शर्मिंदगी का एहसास लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप जून 26, 2018 हम चाह कर भी आपका दीदार न कर पाए , इस आलसी तन ने मेरे मन को बहुत दुःख पहुंचाए | चाहत तो हुस्न- ए- शबाब रूबरू की थी, पर ज़माने के तनाज़े ने मुहे आजमाए | और पढ़ें