अच्छा लगा
बादलोँ सा काफ़िला आता हुआ अच्छा लगा, प्यासी धरती को हर सावन अच्छा लगा| वह कहाँ आता तवस्सुम-ए-लहरोँ के साथ, अदाओँ भरा हुस्ने-ए-जलवा दिखाना अच्छा लगा| मदहोशी महफ़िल मे उसका चँद लम्होँ के लिए, निशाँ के नीले आँचल मे गेशू घुमाना अच्छा लगा| पहले पहले तो निगाहोँ मे कोई जँचता न था, रफ़्ता रफ़्ता दूसरा फिर तीसरा अच्छा लगा|