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" माँ शारदे वन्दन"

आँनंद मंगल दायिनी हो, प्रतिबिम्ब सी बियो विदारति आव , मंजुल पैजनिया झनकारति काव्य सुधारश भारति आव , झंकृत यंत्र के तंत्रियोँ से जड़ता पे मंत्र सी मारति आव , प्रेम प्रचारति हंस विहारति भारति वीणा संवारति आव | देती तंत्र नाद, झूम झंकृत अम्बर के , बिदिग दिगम्बर के ब्याकरण बोलहि , ज्योति मेति अन्वय मे , साहित्य समन्वय मे,ब्यायी अनुयायी तोँहि निरन्यय कलोलहिँ , दात्र-शक्ति, राष्ट्र-शक्ति , धात्र-सम्बिधात्र शक्ति , ब्रम्हा विष्णु शँकरहु शीश के हिँडोलहि , निरबानी सब बानी , दानि हो बखानि तोहि ,ईशदानी बानी की अशीष पटतोलहि | सूर, तुलसी जैसी कहानियोँ को देके तुहिँ ,कुल गुण तुहिँ भाषा शैलियाँ सिखाती हो , निपट निराला को बनाकर निराला तोहि ,कवि वर्मा को पूरा ईश्वर बनाती हो , अनल अनंत ईश तुम पे असम्भव का , संवृत्त कानन कंज-कुँज विकसाती हो , वज्र मूर्ख हूँ ,कालिदास सा बनाय हमै , सुकवि बनइबू कहाँ भूलि-भूलि जाती हो|

अच्छा लगा

बादलोँ सा काफ़िला आता हुआ अच्छा लगा, प्यासी धरती को हर सावन अच्छा लगा| वह कहाँ आता तवस्सुम-ए-लहरोँ के साथ, अदाओँ भरा हुस्ने-ए-जलवा दिखाना अच्छा लगा| मदहोशी महफ़िल मे उसका चँद लम्होँ के लिए, निशाँ के नीले आँचल मे गेशू घुमाना अच्छा लगा| पहले पहले तो निगाहोँ मे कोई जँचता न था, रफ़्ता रफ़्ता दूसरा फिर तीसरा अच्छा लगा|

बड़ा कवि-

अउरिउ कवी सब आँधर हुवैँ , हमका यक्कै अँखियक बनाऊ रे माई| गणपति अइसन नाक कान मोरा हुवै, बरगद अइसन पेट फुलाऊ रे माई | इनका भाँटा कै पेँड़ बनाकै हमै, मोटका यू. के. लिप्टिस बनाऊ रे माई| आँधी भूकम्प जहाँ से चलै वहीँ दर्रा हुवै तौ बिठाऊ रे माई| अउरिउ कवी सब बगुला हुवैँ, हमका बड़ा हंस बनाउ रे माई| आशा औ लता से पातर बोली , मोरे कंठ का अइसन सजाऊ रे माई | दस गड्डी नोटि हमै कहिया मिली , अइसन ऊँचा मंच बताऊ रे माई| चाहे जवन बस बड़ा हुवै बैँक, वही मँइहा खाता खोलाऊ रे माई|

मेरे बड़े भईया

पग-पग पे दिखाते ज्योति भाव सब ग्रंथ सिखाते हैं, सचमुच मेरे भईया मुझको मंत्र बताते हैं | बोझ नही बनते अपना, मेरा भी बोझ उठाते हैं, लेते नही किसी का कुछ भी प्यार दिखाते हैं, गुरु -वशिष्ठ, द्रोणाचार्य से लगते जड्तंत्र सँवारते हैं, सचमुच मेरे-------|| तल्लीन ही रहते मेरे पढने के सामान सँजोने मे, रखते हमे साथ अपने सोने के हिंडोले मे, निरबानी को सब-बानी बनाते गुरु-मंत्र दिलाते हैँ, सचमुच मेरे भइया मुझको मंत्र बताते हैँ||