रसीले जाम से ज्यादा रंगीली शाम कर दूंगा। मैं अपने दिल की धड़कन को तुम्हारे नाम कर दूंगा। तेरी खुशबू को धूमिल का इरादा कर लिया किसने, तेरी महफ़िल चली जाए तो कत्ल-ए-आम कर दूंगा।।
सुना है बहुत मशहूर हो तुम दिल बहलाने में, कभी तशरीफ़ तो लाओ हमारे गरीबख़ाने में। लुटा दूंगा तुम पर, ये नभ भर इश्क का जादू । मेहरबां! गुफ्तगू कर लो, तो न जाऊं किसी मयखाने में। (सनत)
फु़र्शत मिले तो काल कीजिए। चाहे आज चाहे काल कीजिए।। लव़ खा़मोश निगाहें नम हैं,शिर्फ़ तेरे दीदार के लिए। रूबरू हो के दिल को मालामाल कीजिए।। इन्सानियत गर कुछ बची हो,कमाल कीजिए। अपने ओर मेरे लम्हे, बेमिसाल कीजिए। तुम न थे तो थी जिंदगानी इक अधूरी दास्तान, गर मिल गए हैं तो अब ना बवाल कीजिए फु़र्शत मिले तो काल कीजिए। चाहे आज चाहे काल कीजिए।।
कविता लिखौ जौ पाण्डेय ब्यंजना औ लच्छना से, याद कर उसको सुनना भी जरुरी है / लोभ मोह त्याग कर जाति धर्म लिंग भाव , मानव को आदर्श बाना भी जरुरी है // रस छंद अलंकार दोहा सोरठा से , बिनु घ्हूँघट के दुल्हन सा सजाना भी जरुरी है / कविता मने माँ भावै चाहे भ्ाेजेम भेज जावै , जोरदार तालियां बजाना भी जरुरी है //