"भारतीय गणतन्त्र कहां तक सफल"
सफलता
आज भारतीय गणतंत्र की स्थापना को 6 दशक से अधिक समय भी व्यतीत हो चुका है मगर आज हम पीछे मुड़कर देखें तो हमें उसकी बहुमुखी उपलब्धियों पर गर्व होता है। आज भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहलाने का गौरव रखता है। सन् 1950 में मात्र 5.8 करोड़ टन खाद्द्यान्न उत्पादन करने वाला देश भारत आज 2400 करोड़ खाद्द्यान्न के साथ तेजी से बढ़ती जनसंख्या का पेट पालने में पूर्णतया सक्षम है। श्वेत क्रान्ति के बाद 11 करोड़ टन दूध प्रति दिन उत्पादन करके भारत प्रथम स्थान पर है।
पहली पंचवर्षीय योजना में मात्र 2.85 करोड़ हेक्टेयर भूमि सिंचित थी। जो आज 10.3 करोड़ हेक्टेयर हो चुकी है। 1947 में जहां जीवन प्रत्याशा 32 वर्ष थी वहीं आज बढ़कर 66 वर्ष पहुंच गयी है।
जहां 1950-51 में शिक्षा में 54 लाख लड़कियों का नामांकन हुआ, वहीं 2010 में 6.76 करोड़ हो गया। सर्व शिक्षा अभियान की सफल क्रियान्विति के बाद अब प्राथमिक शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया जा चुका है जिससे भारत में एक नया सुप्रभात हो रहा है।
आज भारत में तीन लाख मोबाइल कनेक्शन प्रति दिन दिये जा रहे हैं। आज हमारे खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा और परिपक्वता का लोहा मनवा रहे हैं। सूचना का अधिकार कानून ने हमें ऐसा अमोघ अस्त्र प्रदान किया है जिससे हम किसी भी परिस्थिति का सामना करने में सक्षम है। उच्च शैक्षिक संस्थानों तथा असीम प्रतिभा का धनी भारत विश्व को प्रशिक्षित तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराता है। यदि आज अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने छात्रों को भारतीय छात्रों से सावधान रहने की हिदायत दी है तो वह बदलते भारत का परिणाम है। निःसंदेह हम कह सकते है कि भारतीय गणतंत्र अपने लक्ष्य को पाने में सफल रहा और निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
असफलता
हमारा देश 26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र राष्ट्र घोषित हुआ और उस समय यह लक्ष्य रखा गया कि भारत जल्द ही विश्व में विकसित राष्ट्र के रूप में सामने आयेगा। किन्तु 5 वर्ष भी पूरा नहीं हुआ कि यहां रिश्वतखोरी चोरी और घोटाला शुरू । प्रधानमंत्री पं0 जवाहर लाल नेहरू के जमाने में 14 मई, 1954 में ट्रक एवं ट्रैक्टर रूस से खरीदने में करोड़ों का गोलमाल पकड़ा गया। तब से घाटालों का सिलसिला चल रहा है। राजीव गांधी के शासन काल में आयकर विभाग के 200 अधिकारियों ने 9 शहरों में एक साथ छापामार कर इनके अरबों रूपये का पर्दाफाश किया।
मुलायम के शासन में सी0पी0एम0टी0 का पेपर आउट हुआ। परिणाम घोषित होने पर असंतुष्ट बच्चों ने रोड जाम कर दिया। राजधानी में दो सगे भाइयों ने रेल से कटकर दम तोड़ दिया। क्या यही गणतंत्र की सफलता है कि 2000 करोड़ से अधिक रूपया हाथी और मूर्ति पर व्यय किया गया मायावती के द्वारा। क्या यही गणतंत्र है कि विदेशी भी गांधी परिवार में शादी करने के बाद भी पार्टी का अध्यक्ष बन जाय। गणतंत्र की सफलता क्या इसी में है कि समस्त संसाधनो पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है। गणतंत्र का यही अर्थ है कि घूसखोरों, दलालों और चोरों को दण्ड देने के बजाय उन्हें और बढ़ावा दिया जाय।
मुलायम के शासन में सी0पी0एम0टी0 का पेपर आउट हुआ। परिणाम घोषित होने पर असंतुष्ट बच्चों ने रोड जाम कर दिया। राजधानी में दो सगे भाइयों ने रेल से कटकर दम तोड़ दिया। क्या यही गणतंत्र की सफलता है कि 2000 करोड़ से अधिक रूपया हाथी और मूर्ति पर व्यय किया गया मायावती के द्वारा। क्या यही गणतंत्र है कि विदेशी भी गांधी परिवार में शादी करने के बाद भी पार्टी का अध्यक्ष बन जाय। गणतंत्र की सफलता क्या इसी में है कि समस्त संसाधनो पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है। गणतंत्र का यही अर्थ है कि घूसखोरों, दलालों और चोरों को दण्ड देने के बजाय उन्हें और बढ़ावा दिया जाय।
ऐसे भ्रष्ट शासन को हम लोपतंत्र ही कह सकते हैं गणतंत्र किस बात का। चीन हमसे दो वर्ष बाद स्वतंत्र हुआ और वह दुनिया के महाशक्तियों के रूप में उभरकर सामने आया। उपरोक्त कथनो के निष्कर्ष के रूप में कह सकता हूँ कि भारतीय गणतंत्र अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में पूर्णतया असफल रहा है। इसकी तस्वीर भयानक है। चेहरा विकृत है एक शेर याद आता है-
चले संवारने सूरत तो बिगड़ती चली गयी।
पहले से हो गया जहाँ और भी खराब।।
- सनत साँकृत पाण्डेय
(शोध-छात्र)
जीते रहो बेटा प्रगति करो आभार तुम्हारे लिए .......
जवाब देंहटाएंBahut sundar man ki abhivyakti , subh kamnauey,
जवाब देंहटाएंउपयोगी पोस्ट...सार्थक प्रयास
जवाब देंहटाएंक्या बात है?...एक उपयोगी पोस्ट
जवाब देंहटाएंवाह भइया जी! लगे रहो
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंwah!
जवाब देंहटाएंचले संवारने सूरत तो बिगड़ती चली गयी।
जवाब देंहटाएंपहले से हो गया जहाँ और भी खराब।।
..................वाह गुरु जी /